Categorisation of Sins 1 यूहन्ना 5:16-17


यदि कोई अपने भाई को ऐसा पाप करते देखे, जिसका फल मृत्‍यु न हो, तो विनती करे, और परमेश्‍वर, उसे, उनके लिये, जिन्‍हों ने ऐसा पाप किया है जिसका फल मृत्‍यु न हो, जीवन देगा : पाप ऐसा भी होता है जिसका फल मृत्‍यु है : इस के विषय में मै विनती करने के लिये नहीं कहता। सब प्रकार का अधर्म तो पाप है, परन्‍तु ऐसा पाप भी है, जिसका फल मृत्‍यु नहीं।।