परमेश्वर के नाम की महिमा हो ।

मसीह में मेरे प्रिय भाई और बहन आप सभी को मसीह यीशु में नमस्कार

आज और कल हमारे देश में एक रीति को पूरा किया जाता है जिसे लोग दीवाली कहते है इसके पीछे का इतिहास आप सब जानते है ।

मगर परमेश्वर का वचन इसके बारे में क्या कहता है क्या एक विस्वशी भी दीवाली या और किसी तरह के रिवाज को या त्यौहार को अन्य जातियों के साथ मना सकता है ज्यादातर विस्वशी सोचते है ऐसा करना ठीक होगा नहीं तो मेरा मित्र सम्बन्धी या परिवार नाराज हो जायेगा मै कोई मूर्ति पूजा नहीं करूँगा बाकि सब तो कर सकता हूँ और कितने तो हम में से इन रिवाजों त्योहारों और रीतियों की बधाई भी एक दुसरे को देते है ।

शायद आप अपने नजरिये में ठीक होंगे मगर आपका ठीक होना कोई मायने नहीं रखता क्योंकि हम सब का एक ही न्यायी है यीशु और एक ही सविधान है बाइबल ।

आइये इसके बारे में बाइबल क्या कहती है उसपर गोर करें.....

2 कुरि 6:14-18:
अविश्वासियों के साथ असमान जूए में न जुतो, क्योंकि धामिर्कता और अधर्म का क्या मेल जोल? या ज्योति और अन्धकार की क्या संगति? 
और मसीह का बलियाल के साथ क्या लगाव? या विश्वासी के साथ अविश्वासी का क्या नाता? 
और मूरतों के साथ परमेश्वर के मन्दिर का क्या सम्बन्ध? क्योंकि हम तो जीवते परमेश्वर का मन्दिर हैं; जैसा परमेश्वर ने कहा है कि मैं उन में बसूंगा और उन में चला फिरा करूंगा; और मैं उन का परमेश्वर हूंगा, और वे मेरे लोग होंगे। 
         इसलिये प्रभु कहता है, 
कि उन के बीच में से निकलो और अलग रहो; और अशुद्ध वस्तु को मत छूओ, 
        तो मैं तुम्हें ग्रहण करूंगा। 
और तुम्हारा पिता हूंगा, और तुम मेरे बेटे और बेटियां होगे: यह सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर का वचन है॥"
परमेश्वर जो सर्वशक्तिमान है वह कहता है उनके बीच में से निकलो और अलग रहो.... तो...मै तुन्हें ग्रहण करूँगा।

मेरे प्यारों अगर हम अलग नहीं होते तो यह हमारे पिता को दुःख देता है और वह हमे ग्रहण भी नहीं करता वो चाहता है हम अन्य जाती लोगो के बिच उसके गवाह हों । 

जो वस्तुएं व्यभिचार के लिये उपयोंग होती है वो अशुद्ध है और हम जानते है परमेश्वर को छोड़ किसी और की पूजा आराधना करना व्यभिचार है परमेश्वर चाहता है हम इनसे अलग रहें । हम बोलते है नहीं ये बातें तो हमारे पुर्वज लोगो से आई है हम उन्ही के कारण मानते है क्योंकि इनका कोई आधार नहीं है पर ये वो रीति है जो लोगो ने चलाई है और आगे के लोग इन्हें मानते आये और आज हम भी इन्हें मान रहे है । मगर मेरे प्यार भाई आपको इनसे छुड़ाने के लिये परमेश्वर ने अपने पुत्र यीशु का लहू बहाया (1पत 1:18) और अगर आप आज भी इन्ही पर चलते है तो आप परमेश्वर के पुत्र की कीमत को व्यर्थ जानते है और उसके लहू को व्यर्थ ठहराते है । परमेश्वर चाहता है हम उनके बीच में से निकल जायें और दीपकों के समान दिखाई दे।

आप क्या चाहते है ....... अपने आप को खुश करना या परमेश्वर की इच्छा पूरा करना .....