यजुर्वेद-23:3
ना तस्त प्रतिमा अस्ति:
( *इसकी इजाजत नहीं की तुम परमेश्वर की मूर्ति बनाना* )
*गरुड़ पुराण धर्म कांड परेत खंड-38:13*
इश्वर ना तो लकड़ी में है!
ना पत्थर में' और ना मिट्ठी से बनी मूर्ति में !
*श्रीमद्भगवद महापुराण-11:84-10*
मिट्ठी पत्थर वगैरह की मुर्तिया इश्वर नहीं होती !
*श्रीमद्भगवद गीता-9:11*
मेरे गुणों को ना जाननेवाले मुर्ख लोग मुजे शरीर वाला समजकर मेरा अपमान करते है!
*यजुर्वेद-40:1*
इश्वर हर जगह रहनेवाला नूर (light) है !
*यजुर्वेद -3:32*
इश्वर की कोई मूर्ति नहीं
उसका नाम ही महान है !
*यजुर्वेद -32:3*
वेह लोग अंधेरे की गहराई में डूब जाते है जो असम्भूति ( material in basic form )
जैसे आग 'पानी' वगैरह की पूजा करते है!
वेह लोग इसमें भी गहरे अँधेरे में डूब जाते है , जो सम्भूति से बनी चिजों की *पूजा* करते है
( मूर्ति वगैरा)
*गीता -15:17*
अविनाशी परमेश्वर तो कोई ओइ और (उत्तम पुरुष' *परमात्मा* महाविराट पुरुष, ऋग्वेद- प्रजापति)
*मूंडक उपनिषद*
वो परमात्मा है!
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Courtesy by:-
The Disciples Community Trust
Ladwa City - India