क्या मुझे धर्म परिवर्तन करना होगा?



किसी ने मुझ से सवाल किया था, "में मोक्ष पाना चाहता हूँ मुझे क्या ईसाई बनना पड़ेगा?"

मेरा जवाब -

हमें  क्या चाहिए धर्म या मुक्ति [मोक्ष] ?

यदि धर्म चाहिए तो वो प्रभु यीशु के पास नहीं है l
यदि मुक्ति चाहिए तो प्रभु यीशु बुलाते हैं

प्रभु यीशु ने कहा – "मार्ग, सत्य और जीवन मैं हूँ" - यूहन्ना १४:६

ये धर्म का चुनाव नहीं है l ये मोक्ष मार्ग का चुनाव है, सत्य का चुनाव है , मृंत्युंजयी जीवन का चुनाव है l

प्रभ यीशु ने मत्ती २३:१५ में यहूदी धर्म गुरुओं से कहा. तुम समुन्दर पार एक व्यक्ति का धर्मपरिवर्तन कराने जाते हो और उसे अपने

आप से दो गुना अधिक नारकीय बना देते हो. मोक्ष तो दूर है  उसकी आत्मा भी नष्ट हो जाती है. इसका अर्थ है प्रभु यीशु ने धर्म परिवर्तन का काम नहीं सिखाया

ऐसा क्यों ?

वो इसलिए की धर्म, मनुष्य द्वारा मुक्ति पाने का असफल प्रयास है l

लेकिन यदि परमेश्वर स्वयं हमारे बीच में मुक्ति देने आ जाते हैं तो हमें धर्म नहीं चाहिए, मार्ग, सत्य  और जीवन चाहिए

धर्म के पहले परमेश्वर है, और धर्म व संसार के अंत हो जाने पर भी परमेश्वर अस्तित्व में रहेंगे l

ईसाई धर्म प्रभु यीशु ने प्रारम्भ नहीं किया

प्रभु यीशु के बलिदान और स्वर्गारोहण के ३०० साल बाद ये महाराजा कोंस्तांतिने ने बनाया l

बाइबिल में धर्म शब्द नहीं है न ही प्रभु यीशु ने इस शब्द का प्रयोग किया है l

बाइबिल धर्मशास्त्र नहीं है पवित्रशास्त्र है l

प्रभु यीशु आप को धर्म में नहीं बुलाते हैं पर मुक्ति दान देने के लिए अपने पास बुलाते हैं

और कहते हैं - मोक्षमार्ग, सम्पूर्ण सत्य और मृंत्युंजयी जीवन में हूँ l

धर्म के ठेकेदारों को उन्होंने कपटी कहा

ये जो शिक्षा देते हैं उस पर खुद अमल नहीं करते

रीतिरिवाज और त्योहारों पर जोर देते हैं लेकिन सत्य को लोगों से छिपा कर रखते हैं

धर्म ग्रन्थ का पाठ और रटीरटाई प्रार्थना , शारीरिक प्रयासों से आत्मिक मुक्ति दिलाने का झूठा वादा  करते हैं l

प्रभु यीशु ने कहा मुक्ति के लिए परिश्रम करने वालो और पाप के बोझ से दबे हुए लोग मेरे पास आओ में तुम्हे मोक्ष दूंगा l

धर्म परिवर्तन नहीं करिये, लेकिन मोक्ष अवश्य प्राप्त करिये

धर्म अनेक हैं पर मोक्षदाता बस एक हैं - प्रभ यीशु